गुवाहाटी, 3 नवंबर: सत्ता में रहते हुए BJP के सड़क पर उतरकर आंदोलन करने पर कांग्रेस के एक वर्ग की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि सत्ताधारी दल सड़क पर आंदोलन नहीं कर सकता। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेताओं को इतिहास पढ़ने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1935 के बाद देश के कई राज्यों में कांग्रेस की सरकारें होने के बावजूद महात्मा गांधी ने आजादी के लिए आंदोलन जारी रखा था। उन्होंने असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोपीनाथ बोरदोलोई का भी जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी गांधीजी के आंदोलन जारी थे।
सरमा के मुताबिक, आंदोलन केवल सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं होते। गरीबी और निरक्षरता के खिलाफ अभियान के साथ-साथ शिक्षा, खेल, संस्कृति और लोकतंत्र की रक्षा के लिए भी आंदोलन किए जा सकते हैं।
सत्ताधारी दल और विपक्ष के आंदोलनों के बीच अंतर बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ताधारी दल के आंदोलन अनुशासित और जन-जागरूकता पैदा करने वाले होने चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम अनुमति लेकर और पुलिस के निर्देशों का पालन करते हुए आयोजित किए जाते हैं। वहीं, उन्होंने दावा किया कि विपक्ष के आंदोलनों में कभी-कभी धक्का-मुक्की और अव्यवस्था देखने को मिलती है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सरकार की ओर से खेल, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने 7 तारीख से शुरू होने वाले 'खेल महारण' को खेलों का आंदोलन बताया।
सरमा ने कहा कि हर आंदोलन नकारात्मक नहीं होता। समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भी आंदोलनों की जरूरत होती है।