3 नवंबर: बांग्लादेश में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कपड़ा मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक हो गया है। पड़ोसी देश में बिगड़ते हालात पर भारत भी नजर बनाए हुए है। मंगलवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत बांग्लादेश में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहा है।

ढाका के मीरपुर, आशुलिया, गाजीपुर और नारायणगंज समेत कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच झड़पें हुई हैं। प्रदर्शनकारियों पर वाहनों में तोड़फोड़ करने और प्रमुख सड़कों को जाम करने के आरोप हैं। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछार और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं।

बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के चलते ढाका, गाजीपुर और मध्य मयमनसिंह में करीब 4,000 पंजीकृत कपड़ा कारखानों में से 670 को बंद करना पड़ा है।

मजदूरों की मांग है कि न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका किया जाए। BGMEA के मुताबिक, बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग में 40 लाख से अधिक लोग काम करते हैं। यह उद्योग देश की निर्यात आय का एक प्रमुख स्रोत है।

इस बीच, बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अब भंग हो चुकी अवामी लीग से जुड़े कुछ कारखाना मालिक भी अशांति फैलाने में भूमिका निभा रहे हैं। इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

गाजीपुर के उपायुक्त मोहम्मद नुरुल करीम भुइयां के मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की 10 टुकड़ियां तैनात की गई हैं।