गुवाहाटी, 4 नवंबर: असम सरकार के सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और वित्तीय लेखा-जोखा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने अपनी 2024-25 की राज्य वित्त लेखा परीक्षा रिपोर्ट में बड़ी संख्या में लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्रों (Utilisation Certificates) का उल्लेख किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक कुल 6,545 उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं किए गए थे। इन प्रमाणपत्रों से संबंधित राशि 20,736.09 करोड़ रुपये थी। ये प्रमाणपत्र इस बात की पुष्टि करने के लिए जरूरी होते हैं कि सरकारी अनुदान का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए किया गया या नहीं, जिसके लिए उसे मंजूरी दी गई थी।

CAG के अनुसार, कुल 6,929 उपयोगिता प्रमाणपत्रों के जरिए 23,240.56 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब जमा किया जाना था। इनमें से केवल 384 प्रमाणपत्रों के माध्यम से 2,504.47 करोड़ रुपये का हिसाब दिया गया। शेष 6,545 प्रमाणपत्रों से संबंधित 20,736.09 करोड़ रुपये का हिसाब लंबित था।

किन विभागों में सबसे अधिक राशि का हिसाब लंबित?

वित्त विभाग में 33 उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित थे, जिनसे संबंधित राशि 4,067.06 करोड़ रुपये थी।

मैदानी जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में 384 प्रमाणपत्रों के तहत 1,987.31 करोड़ रुपये का हिसाब लंबित था। शिक्षा (सामान्य) विभाग में 317 प्रमाणपत्रों के तहत 1,909.18 करोड़ रुपये और समाज कल्याण विभाग में 296 प्रमाणपत्रों के तहत 1,764.16 करोड़ रुपये का हिसाब जमा नहीं किया गया था।

सचिवालय प्रशासन विभाग में भी 128 उपयोगिता प्रमाणपत्रों के तहत 1,456.57 करोड़ रुपये का हिसाब लंबित था।

ये आंकड़े राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों में खर्च का हिसाब जमा करने में हो रही देरी को उजागर करते हैं।

वर्षों से लंबित हैं उपयोगिता प्रमाणपत्र

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ उपयोगिता प्रमाणपत्र 2005-06 से ही लंबित हैं। इसका अर्थ है कि कुछ सरकारी अनुदानों के खर्च का हिसाब लगभग दो दशकों से पूरा नहीं हुआ है।

रिपोर्ट में प्रमाणपत्र जमा करने की निर्धारित अवधि के आधार पर वर्षवार आंकड़े भी दिए गए हैं।

2019-20 से पहले के 1,644 प्रमाणपत्रों के तहत 4,732 करोड़ रुपये का हिसाब लंबित था। 2019-20 के लिए 1,042.31 करोड़ रुपये, 2020-21 के लिए 2,663.56 करोड़ रुपये, 2021-22 के लिए 1,936.44 करोड़ रुपये और 2022-23 के लिए 1,750.05 करोड़ रुपये लंबित थे।

वहीं, 2023-24 के लिए 4,447.42 करोड़ रुपये और 2024-25 के लिए 4,164.31 करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं किए गए थे। इन दोनों वित्तीय वर्षों का कुल लंबित आंकड़ा 8,611.73 करोड़ रुपये था।

यहां उल्लिखित वर्ष उन वर्षों को दर्शाते हैं, जिनमें उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा किए जाने थे। ये जरूरी नहीं कि अनुदान जारी किए जाने के वर्ष हों।

नियमों के अनुसार समय पर जमा करना होता है खर्च का हिसाब

असम वित्तीय नियम, 1939 के नियम 517 के अनुसार, किसी विशेष उद्देश्य के लिए दिया गया अनुदान निर्धारित उद्देश्य पर उचित समय के भीतर खर्च किया जाना चाहिए। यदि पूरी राशि खर्च नहीं होती है, तो बची हुई रकम सरकार को वापस करनी होती है।

इसी तरह, असम कोषागार नियम, 2017 के नियम 256 के तहत अनुदान मंजूर करने वाले प्राधिकारी को संबंधित संस्थाओं से उपयोगिता प्रमाणपत्र और ऑडिट किए गए खाते प्राप्त कर महालेखाकार के कार्यालय में जमा कराने होते हैं।

CAG के अनुसार, सामान्य तौर पर अनुदान प्राप्त होने के एक वर्ष के भीतर या उसी उद्देश्य के लिए अगला अनुदान मांगने से पहले उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करना चाहिए।

हालांकि, रिपोर्ट में पाया गया कि बड़ी संख्या में प्रमाणपत्र वर्षों से लंबित हैं।

सरकार के निर्देश और बाद की स्थिति

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे को मार्च 2024, फरवरी 2025 और अगस्त 2025 में वित्त विभाग के संज्ञान में लाया गया था। वित्त विभाग ने संबंधित विभागों को लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करने के निर्देश भी दिए थे।

13 और 14 अक्टूबर 2025 को हुई बैठकों में वित्त विभाग ने 30 नवंबर 2025 तक 50 प्रतिशत लंबित प्रमाणपत्र और दिसंबर 2025 के अंत तक सभी लंबित प्रमाणपत्र जमा करने का लक्ष्य निर्धारित किया था।

19 दिसंबर 2025 को हुई Exit Conference के दौरान वित्त आयुक्त एवं सचिव ने CAG को बताया कि इस मामले को सुलझाने के लिए समीक्षा बैठकें और लगातार निगरानी की जा रही है।

इसके बाद 20 दिसंबर 2025 को वित्त (ऑडिट एवं फंड) विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) के नवीनतम आंकड़ों में लंबित राशि 26,682.37 करोड़ रुपये से घटकर 14,100.78 करोड़ रुपये हो गई थी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि 20,736.09 करोड़ रुपये का आंकड़ा 31 मार्च 2025 की स्थिति को दर्शाता है, जबकि 14,100.78 करोड़ रुपये दिसंबर 2025 में बताई गई बाद की स्थिति है। दोनों आंकड़े अलग-अलग तारीखों के हैं।

753.61 करोड़ रुपये के अग्रिम भुगतान का हिसाब भी लंबित

CAG की रिपोर्ट में अग्रिम राशि निकालने के बाद उसका विस्तृत हिसाब जमा नहीं करने का मामला भी सामने आया है।

31 मार्च 2025 तक 39 विभागों ने 1,222 Abstract Contingent (AC) Bills के बदले 753.61 करोड़ रुपये के Detailed Contingent (DC) Bills जमा नहीं किए थे।

2024-25 के दौरान 88.23 करोड़ रुपये के 42 AC Bills का समायोजन नहीं हुआ था। इनमें से छह बिल मार्च 2025 में निकाले गए थे, जिनकी राशि 11.96 करोड़ रुपये थी।

CAG के अनुसार, विस्तृत बिल लंबे समय तक जमा नहीं होने से खर्च की शुद्धता और अंतिम स्थिति की जांच करना मुश्किल हो जाता है तथा सार्वजनिक धन के संभावित दुरुपयोग का जोखिम बढ़ता है। हालांकि, केवल बिल लंबित होने से धन के गबन की पुष्टि नहीं होती।

75 सरकारी निकायों के 494 वार्षिक लेखे जमा नहीं

रिपोर्ट में स्वायत्त परिषदों, विकास परिषदों, सरकारी निकायों और प्राधिकरणों की ओर से वार्षिक लेखे जमा करने में देरी का भी उल्लेख है।

सितंबर 2025 तक 75 निकायों और प्राधिकरणों के 2024-25 तक देय 494 वार्षिक लेखे ऑडिट के लिए CAG को प्राप्त नहीं हुए थे।

इनमें से सात लेखे छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाली तीन स्वायत्त जिला परिषदों से संबंधित थे। इसके अलावा, 25 स्वायत्त और जिला परिषदों के 350 वार्षिक लेखे उनकी स्थापना के समय से ही जमा नहीं किए गए थे।

CAG ने 10 फरवरी 2025 को यह मामला मुख्य सचिव के संज्ञान में लाया था। इसके बाद 16 सितंबर 2025 को वित्त विभाग ने संबंधित विभागों को लंबित लेखों की समीक्षा करने का निर्देश दिया था।

44 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के 240 वार्षिक लेखे लंबित

राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लेखा-जोखा में भी देरी सामने आई है।

सितंबर 2025 तक 44 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के 2024-25 तक देय 240 वार्षिक लेखे ऑडिट के लिए प्राप्त नहीं हुए थे।

इनमें से 74 लेखे पांच गैर-कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से संबंधित थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य के 16 गैर-कार्यरत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में से आठ का नाम Registrar of Companies के रिकॉर्ड से हटा दिया गया था।

15,195 करोड़ रुपये के खर्च के वर्गीकरण पर सवाल

CAG ने सरकारी खर्च को ‘Minor Head-800: Other Expenditure’ के तहत वर्गीकृत करने पर भी सवाल उठाए हैं।

2024-25 के दौरान 70 Major Heads के तहत 15,195.07 करोड़ रुपये को इस श्रेणी में दर्ज किया गया था। यह राज्य के कुल राजस्व और पूंजीगत व्यय का 12.03 प्रतिशत था।

CAG ने पाया कि नौ Major Heads के तहत 1,050.73 करोड़ रुपये इस श्रेणी में दर्ज किए गए, जबकि उनके लिए उपयुक्त Minor Heads उपलब्ध थे।

रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह का वर्गीकरण सरकारी खर्च की पारदर्शिता कम करता है और खर्च की वास्तविक प्राथमिकताओं का विश्लेषण करना कठिन बनाता है।

विभागीय खर्च के 35 प्रतिशत से अधिक आंकड़ों का मिलान नहीं

रिपोर्ट में विभागीय खातों के मिलान (Reconciliation) में भी बड़ी कमी बताई गई है।

2024-25 के दौरान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) के रिकॉर्ड में दर्ज प्राप्तियों का 34.48 प्रतिशत और खर्च का 35.09 प्रतिशत संबंधित विभागों द्वारा मिलान नहीं किया गया था।

वित्त विभाग के निर्देशों के अनुसार विभागों को हर तिमाही अपने खातों का मिलान करना चाहिए। लेकिन ऑडिट में इस प्रक्रिया के पालन में बड़ी कमी पाई गई।

नकद शेष के आंकड़ों में 274.97 करोड़ रुपये का अंतर

CAG की रिपोर्ट में महालेखाकार और भारतीय रिजर्व बैंक के नकद शेष के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर दर्ज किया गया है।

31 मार्च 2025 तक महालेखाकार के रिकॉर्ड में 276.95 करोड़ रुपये का क्रेडिट बैलेंस था, जबकि RBI ने 1.98 करोड़ रुपये का डेबिट बैलेंस दर्ज किया था।

दोनों आंकड़ों के बीच 274.97 करोड़ रुपये का अंतर था। रिपोर्ट के अनुसार, इसका मुख्य कारण कोषागार, RBI, एजेंसी बैंकों और महालेखाकार कार्यालय के बीच खातों का मिलान लंबित रहना था।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल

CAG की रिपोर्ट में सामने आए ये आंकड़े असम सरकार के वित्तीय प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

20,736.09 करोड़ रुपये से संबंधित उपयोगिता प्रमाणपत्र निर्धारित समय पर क्यों जमा नहीं किए गए? किन विभागों ने नियमों का पालन नहीं किया? सरकारी अनुदान का कितना हिस्सा निर्धारित उद्देश्य पर खर्च हुआ और कितनी राशि का उपयोग अभी तक ऑडिट के जरिए सत्यापित नहीं हो पाया है?

उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं होने का अर्थ अपने आप में धन का गबन साबित होना नहीं है। लेकिन इन दस्तावेजों के अभाव में ऑडिट यह सुनिश्चित नहीं कर सकता कि अनुदान का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए हुआ या नहीं और उससे अपेक्षित संपत्ति अथवा परिणाम प्राप्त हुए या नहीं।

सार्वजनिक धन करदाताओं और सरकारी राजस्व से आता है। इसलिए प्रत्येक रुपये के उपयोग का पारदर्शी हिसाब देना सरकार की जिम्मेदारी है।

CAG की रिपोर्ट ने अब विभागवार जानकारी सार्वजनिक करने, अद्यतन आंकड़े जारी करने और वर्षों से लंबित वित्तीय रिकॉर्ड के लिए जवाबदेही तय करने की आवश्यकता को सामने ला दिया है।

Relevant Official Documents and Sources:

1. Complete CAG Report – State Finances Audit Report, Government of Assam, 2024-25

2. Complete CAG PDF – Report No. 2 of 2026

3. Chapter 3: Financial Reporting – Financial Reporting

4. CAG Executive Summary – Executive Summary

5. Information on the Tabling of the Report in the Assam Legislative Assembly – Press Information Bureau