3 नवंबर: INDIA गठबंधन के घटक दल नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ पार्टी से भी अपना 24 साल पुराना राजनीतिक संबंध समाप्त कर दिया है। मेहदी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार के रूप में INDIA गठबंधन के समर्थन से श्रीनगर सीट पर जीत दर्ज की थी। उन्होंने मंगलवार को अपने फैसले की औपचारिक घोषणा की।

बडगाम के बेहिश्त-ए-जहरा पार्क में अपने पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर आयोजित जनसभा में समर्थकों के सामने उन्होंने यह घोषणा की। मेहदी ने अपने इस फैसले को “सिद्धांतों की राजनीति की जीत” बताया।

मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व पर 2024 के चुनावों के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष रूप से अनुच्छेद 370 की बहाली, जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, आरक्षण नीति में बदलाव और कैदियों की रिहाई जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।

अपने इस्तीफे के पत्र में मेहदी ने 2019 में अनुच्छेद 370 और 35A को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय लोगों के अधिकारों की बहाली के लिए एक मजबूत राजनीतिक संघर्ष की जरूरत थी। इसी उम्मीद के साथ उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई थी। हालांकि, उनका आरोप है कि चुनाव में बड़ा जनादेश मिलने के बाद पार्टी अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से पीछे हट गई।

मेहदी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी नेतृत्व की राजनीतिक स्थिति की भी आलोचना की। उनका आरोप है कि लोगों के अधिकारों की बहाली के लिए संघर्ष जारी रखने के बजाय पार्टी ने सरकार चलाने को प्राथमिकता दी। ये आरोप मेहदी के अपने राजनीतिक बयान हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका फैसला किसी व्यक्तिगत नाराजगी, पार्टी में पद नहीं मिलने की निराशा या सत्ता की इच्छा से प्रेरित नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अपने विवेक, सिद्धांतों और राजनीतिक मान्यताओं से समझौता नहीं कर सकते।

मेहदी ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल होना नहीं है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों और कल्याण के लिए काम करने वाले प्रतिबद्ध युवाओं तथा समान विचारधारा वाले लोगों को एकजुट कर नया राजनीतिक मंच बनाने का संकेत दिया।

मेहदी ने 3 नवंबर को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अपना इस्तीफा सौंपा। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 101(3)(b) और लोकसभा की कार्यप्रणाली के नियम 240 के तहत इस्तीफा दिया है। हालांकि, श्रीनगर की लोकसभा सीट अध्यक्ष द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद ही आधिकारिक रूप से रिक्त होगी।