भूमि अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले 118 दिनों की हिरासत के बाद जेल से बाहर आ गए। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत उनकी हिरासत के आदेश को गौहाटी उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया था। इसके बाद उन्हें रिहा किया गया।
जेल से बाहर आने के बाद पहली प्रतिक्रिया में डोले ने असम की जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिन लोगों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई, यह उनकी भी जीत है।
उन्होंने कहा, “झूठ की कभी जीत नहीं हो सकती। यह असम की जनता की जीत है।” उन्होंने उनके पक्ष में कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वकीलों और मामले की सच्चाई सामने लाने की कोशिश करने वाले पत्रकारों को भी धन्यवाद दिया।
डोले ने NSA जैसे कठोर कानून के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर झूठे आरोपों के आधार पर ऐसा कानून नहीं लगाया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से इसके खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि संविधान नागरिकों को सुरक्षा और अपनी बात रखने का अधिकार देता है। इस अधिकार को सीमित कर NSA जैसे कानून के तहत लोगों को हिरासत में रखना गलत है।
डोले ने संबंधित मंत्रियों और पुलिस अधिकारियों से लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने की अपील की। उन्होंने टिंगले पथार, काजीरंगा और असम के अन्य इलाकों में जमीन के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि पत्रकारों ने उनकी आवाज जनता तक पहुंचाने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा कि गीता गोआला और मीना गोआला जैसी महिलाओं के साथ खड़े होने को यदि अपराध माना जाता है, तो भी वह असम के लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहेंगे।