गुवाहाटी, 6 नवंबर: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घनकांत गोगोई की पुलिस मुठभेड़ में मौत को लेकर गलत जानकारी न फैलाने की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने गोगोई को नहीं मारा था, बल्कि गोगोई ने पुलिस पर गोली चलाई थी, जिसके बाद पुलिस को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मीडिया को यह धारणा नहीं बनानी चाहिए कि पुलिस ने जानबूझकर घनकांत गोगोई की हत्या की। सिद्धार्थ शर्मा या श्यामकानु महंत के पास भी अगर पिस्तौल होती और वे पुलिस पर गोली चलाते, तो पुलिस जवाबी कार्रवाई करती।

उन्होंने कहा, “हमने किसी को नहीं मारा है। यह धारणा मत दीजिए कि पुलिस ने घनकांत गोगोई को मारा है। हम ऐसा कैसे कर सकते हैं?”

इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सरमा ने कहा कि लोकतंत्र में न्याय देने का अधिकार केवल अदालतों को है। पुलिस या सरकार किसी को दोषी ठहराकर सजा नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि सरकार ने गोगोई के मामले में कोई न्याय नहीं किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई आरोपी पुलिस पर गोली चलाता है या भागने की कोशिश करता है, तो पुलिस को कार्रवाई करनी पड़ती है। उन्होंने गोगोई को “पेशेवर हत्यारा” बताते हुए कहा कि उनका व्यवहार अलग होना चाहिए था।

सरमा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश उज्जल भुइयां की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें पुलिस द्वारा तत्काल न्याय देने के अधिकार पर सवाल उठाया गया था। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस खुद न्याय करने की कोशिश करती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि घनकांत गोगोई की मौत की मजिस्ट्रेट जांच की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं की जांच होती है और इस मामले की भी जांच की जाएगी।

उन्होंने मीडिया से अपील की कि जांच पूरी होने से पहले इस घटना को पुलिस द्वारा जानबूझकर की गई हत्या के रूप में पेश न किया जाए।