धेमाजी, 7 नवंबर: अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना (SUMP) के विरोध में निकाला गया मार्च 6 नवंबर को असम में प्रवेश कर गया। प्रदर्शनकारी धेमाजी जिले के जोनई पहुंचे, जहां विभिन्न संगठनों ने उनका स्वागत करते हुए आंदोलन को समर्थन दिया।

आदि गालो वेलफेयर सोसाइटी के नेतृत्व में यह मार्च 4 नवंबर को अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले के गेकू से शुरू हुआ था। राज्य के विभिन्न इलाकों से गुजरने के बाद प्रदर्शनकारी रुकसिन होते हुए जोनई पहुंचे।

असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद, असम जातीय परिषद (AJP) और कृषक मुक्ति संग्राम समिति सहित कई संगठनों ने प्रदर्शनकारियों का स्वागत किया।

असम जातीय परिषद के महासचिव चित्तरंजन बसुमतारी ने प्रस्तावित बड़े बांध की आलोचना करते हुए कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र के प्राकृतिक पर्यावरण, आजीविका, संस्कृति और जीवनशैली पर गंभीर असर पड़ सकता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि चीन के मेडोग में प्रस्तावित 60,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के जवाब में सियांग घाटी को बड़े बांध के लिए क्यों चुना जा रहा है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की चिंताओं और सहमति को महत्व देने की मांग की।

असम जातीयतावादी युवा छात्र परिषद के केंद्रीय वित्त सचिव ज्ञान शर्मा ने भी परियोजना का विरोध करते हुए आदि समुदाय के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही।

प्रदर्शनकारियों की मांगों में परियोजना रद्द करना, हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई, 48 युवाओं के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेना, प्रभावित गांवों से सुरक्षा बलों को हटाना, निलंबन आदेश रद्द करना और सरकार के साथ शांतिपूर्ण बातचीत शुरू करना शामिल है।