नई दिल्ली, 5 नवंबर: भारत निर्वाचन आयोग ने छह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के वार्षिक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) की घोषणा की है। इस प्रक्रिया में नए और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के नाम जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, मतदाता सूची से गलत तरीके से नाम हटाए जाने से रोकने के लिए सुरक्षा उपाय भी लागू किए गए हैं।

यह प्रक्रिया अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में लागू होगी। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची का मसौदा 30 नवंबर को प्रकाशित किया जाएगा, जबकि अंतिम सूची 21 जनवरी, 2027 को जारी होगी।

इसके तहत उन लोगों को अग्रिम आवेदन की सुविधा भी मिलेगी, जो 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर, 2027 को मतदान के लिए पात्र होंगे।

मतदाता सूची से नाम हटाने के मामलों में आयोग ने कुछ सुरक्षा उपाय तय किए हैं। बार-बार या एक से अधिक प्रविष्टियों से जुड़े नाम हटाने के आवेदनों का क्षेत्रीय स्तर पर सत्यापन किया जाएगा।

किसी मतदान केंद्र के कुल मतदाताओं के दो प्रतिशत से अधिक नाम हटाने के आवेदन मिलने पर निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों को स्वयं उनकी दोबारा जांच करनी होगी। इसी तरह, यदि कोई एक आपत्तिकर्ता पांच से अधिक आपत्तियां दर्ज कराता है, तो उन मामलों की भी विशेष जांच होगी।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रपत्र 6 और 8 में आधार विवरण देना स्वैच्छिक रहेगा। केवल आधार विवरण उपलब्ध नहीं कराने के आधार पर किसी का नाम मतदाता सूची में जोड़ने का आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता और न ही मौजूदा मतदाता का नाम हटाया जा सकता है।

इससे पहले 15 अक्टूबर को आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा और पंजाब सहित 17 राज्यों में भी विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की घोषणा की थी।

आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त कर्मचारियों और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।